Ultrastructure of cell and cell organelles
कोशिका व कोशिकांगों की सूक्ष्म संरचना (Ultrastructure of cell and cell organelles):-
सामान्य परिचय (General Introduction):-
· पादप कोशिकाएं यूकेरियोटिक कोशिकाएं होती हैं जो अन्य यूकेरियोटिक जीवों से अनेक मूलभूत कारकों में भिन्न होती हैं।
· पादप और जन्तु कोशिका दोनों में एक जैसे कोशिकांग व केन्द्रक होते है।
· जन्तु कोशिका से भिन्न पादप कोशिका में कोशिका झिल्ली के बाहर एक कोशिका भित्ति उपस्थित होती है।
· पादप कोशिका आयताकार है और तुलनात्मक रूप से जन्तु कोशिका से बड़ी है।
· यध्यपि पादप और जन्तु कोशिकाएं यूकेरियोटिक होती हैं और कुछ कोशिकांगों को साझा करती हैं, परन्तु जन्तु कोशिकाओं की तुलना में पादप कोशिकाएं काफी अलग हैं क्योंकि वे अलग-अलग कार्य करती हैं।
कोशिकांगों की सूक्ष्म संरचना (Ultrastructure of Cell Organelles):-
शरीर के भीतर विभिन्न अंगों की तरह, पादप कोशिका संरचना में कोशिकांगों के रूप में विभिन्न घटक शामिल होते हैं जो अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अलग-अलग कार्य करते हैं। इन कोशिकांगों में शामिल हैं:-
1. कोशिका भित्ति (Cell Wall):-
· दृढ़ निर्जीव आवरण है।
· यह एक कठोर परत है जो सेल्यूलोज, ग्लाइकोप्रोटीन, लिग्निन, पेक्टिन और हेमिकेलोलोज से बनी होती है।
· यह कोशिका झिल्ली के बाहर पायी जाती है।
· इसमें प्रोटीन, पॉलीसेकेराइड और सेल्यूलोज पाये जाते हैं।
· कोशिका भित्ति का प्राथमिक कार्य कोशिका की सुरक्षा करना और संरचनात्मक सहायता प्रदान करना होता है।
· पादप कोशिका भित्ति यांत्रिक दबाव के प्रति कोशिका की सुरक्षा करती है और कोशिका को आकार, आकृति और संरचना प्रदान करती है।
· कोशिका की यांत्रिक क्षति व संक्रमण से रक्षा करती है।
· यह कोशिका के अंदर और बाहर गुजरने वाले अणुओं को भी छानती है।
· कोशिका भित्ति का निर्माण माइक्रोट्यूबुल्स द्वारा निर्देशित होता है।
· इसमें तीन परतें होती हैं, अर्थात् प्राथमिक, द्वितीयक और मध्य पटलिका।
· प्लाज्मोडेस्माटा:- कोशिकाओं के मध्य सम्पर्क बनाता है।
· मध्य पटलिका Ca - पैक्टेट की बनी होती है जो एक गोन्द के रूप में कार्य करके कोशिकाओं को आपस में जोड़ती है।
· प्राथमिक कोशिका भित्ति एंजाइम द्वारा निर्धारित सेलूलोज़ द्वारा बनाई जाती है।
2. कोशिका झिल्ली (Cell membrane):-
· यह अर्ध-पारगम्य झिल्ली है जो कोशिका भित्ति के भीतर उपस्थित होती है।
· यह विभेदी पारगम्य, विधुत आवेशित व चयनात्मक झिल्ली है।
· यह प्रोटीन और लिपिड की एक पतली परत से बनी होती है।
· सिंगर व निकोल्सन (1972):- इन्होने तरल मोजेक मॉडल दिया जो एक सर्वमान्य मत है।
Ø 75A° मोटी होती है।
Ø फोस्फोलिपिड के 2 स्तर होते हैं।
Ø प्रोटीन 2 प्रकार से व्यवस्थित होती हैं:-
i. बाह्य प्रोटीन (परिधीय प्रोटीन):- ये दोनों सतहों पर स्थित होते हैं।
ii. आंतरिक प्रोटीन (समाकलित प्रोटीन):- ये वसीय परत के बीच में स्थित होते हैं। इनकी सहायता से प्लाज्मा झिल्ली पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है।
· कोशिका झिल्ली कोशिका के भीतर विशिष्ट पदार्थों के प्रवेश और निकास को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
· उदाहरण के लिए, कोशिका झिल्ली विषाक्त पदार्थों को अंदर प्रवेश करने से रोकती है, जबकि पोषक तत्वों और आवश्यक खनिजों को प्रवेश करने देती है।
· कार्य:- आकृति, सुरक्षा, परिवहन (विसरण, परासरण, सक्रिय परिवहन)
· जीवद्रव्य शब्द पुरकिंजे ने 1838 में दिया। जीवद्रव्य को जीवन का भौतिक आधार कहते हैं।
जीवद्रव्य = कोशिकाद्रव्य + केंद्रकद्रव्य
3. गॉल्जीकाय (Golgi complex):-
· ये सभी यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाते हैं।
· ये संश्लेषित बड़े अणुओं को कोशिका के विभिन्न भागों में वितरित करने में सहायता करते हैं।
· इसका मुख्य कार्य प्रोटीन का ग्लाइकोसाइलेशन तथा vesicles में पैकिंग करना है।
4. अंत:प्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum):-
· यह केन्द्रक की बाहरी झिल्ली के साथ सतत होती है।
· यह दो प्रकार की होती है -
i. Rough Endoplasmic Reticulum (RER):- इसकी बाहरी सतह पर राइबोसोम उपस्थित होने के कारण यह खुरदरी होती है। यह प्रोटीन निर्माण का कार्य करती है।
ii. Smooth Endoplasmic Reticulum (SER):- इसकी बाहरी सतह पर राइबोसोम नहीं पाये जाते हैं जिस कारण यह चिकनी होती है। यह लिपिड निर्माण का कार्य करती है।
5. लाइसोसोम (Lysosomes):-
· लाइसोसोम को आत्मघाती थैला कहा जाता है क्योंकि ये एक बन्द झिल्ली में पाचन एंजाइम रखते हैं।
· ये कोशिका में पुराने कोशिकांग, खाद्य कणों और विदेशी काय को पचाकर कोशिकीए अपशिष्ट निपटाने का कार्य करते हैं।
· लाइसोसोम मुख्य रूप से यूकेरियोटिक जन्तु कोशिकाओं में पाए जाते हैं और कोशिकीय मलबे को तोड़ने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
· पौधों में, लाइसोसोम की भूमिका रिक्तिका द्वारा पारंपरिक कोशिका जीव विज्ञान द्वारा निर्देशित होती है।
6. राइबोसोम (Ribosomes):-
· इनकी खोज जॉर्ज पैलाडे ने की थी। इसीलिए इन्हें पैलाडे कण भी कहते हैं।
· ये सबसे छोटे झिल्ली-आबद्ध कोशिकांग होते हैं जो RNA और प्रोटीन के बने होते हैं।
· ये प्रोटीन संश्लेषण के लिए स्थल होते हैं, इसलिए, इन्हें कोशिका के प्रोटीन कारखानें भी कहा जाता है।
· ये दो प्रकार के होते हैं -
i. 80S:- ये 60S व 40S उपइकाइयों के जुड़ने से बने होते हैं। ये कोशिकाद्रव्य, RER व बाहरी केन्द्रकीय झिल्ली पर उपस्थित होते हैं।
ii. 70S:- ये 50S व 30S उपइकाइयों के जुड़ने से बने होते हैं। ये माइटोकोंड्रिया व हरितलवक में उपस्थित होते हैं।
7. परॉक्सीसोम (Peroxisomes):-
· परॉक्सीसोम यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाने वाली छोटी पुटिकायें हैं जो एकल झिल्ली-आबद्ध कोशिकांग होते हैं।
· इनमें कोशिका में विषाक्त पदार्थों को तोड़ने के लिए पाचक एंजाइम होते हैं और उपापचय क्रिया के लिए ऑक्सीकारी एंजाइम होते हैं।
· परॉक्सीसोम लिपिड उत्पादन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और एंजाइम कैटालेज द्वारा अभिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों जैसे हाइड्रोजन परॉक्साइड को जल और ऑक्सीजन जैसे सुरक्षित अणुओं में बदलने में भी शामिल होते हैं।
· पौधों में, परॉक्सीसोम प्रकाश संश्लेषण और बीज के अंकुरण की सुविधा प्रदान करते हैं। वे प्रकाश संश्लेषण में कार्बन स्थिरीकरण के दौरान ऊर्जा की हानि को रोकते हैं।
8. रिक्तिका (Vacuoles):-
· केंद्रीय रिक्तिका परिपक्व पादप कोशिका में कोशिका आयतन का लगभग 30% होती है।
· टोनोप्लास्ट एक झिल्ली है जो केंद्रीय रिक्तिका को घेरे रहती है।
· भंडारण के अतिरिक्त केंद्रीय रिक्तिका का जैविक कार्य कोशिका भित्ति के प्रति स्फीति दाब को बनाए रखना है।
· केंद्रीय रिक्तिका में कोशिका रस होता है। यह लवण, एंजाइम और अन्य पदार्थों का मिश्रण है।
· कोशिका अपने अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थ केंद्रीय रिक्तिका में ही डालती है।
9. माइटोकोंड्रिया (Mitochondria):-
· ये सभी यूकेरियोटिक कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में पाए जाने वाले द्वि-झिल्ली आबद्ध कोशिकांग हैं।
· ये वायवीय श्वसन का मुख्य स्थल होते हैं।
· ये कार्बोहाइड्रेट और शर्करा अणुओं को तोड़कर ऊर्जा प्रदान करते हैं, इसलिए इन्हें "कोशिका का शक्तिग्रह" भी कहा जाता है।
· इसकी मैट्रिक्स में एक वृताकर DNA पाया जाता है।
· यह एक अर्धस्वायत कोशिकांग है।
10. हरितलवक (Chloroplasts):-
Øयह फॉस्फोलिपिड झिल्ली से घिरा एक लम्बा कोशिकांग है।
Øक्लोरोप्लास्ट डिस्कनुमा आकृति का होता है और स्ट्रोमा क्लोरोप्लास्ट के भीतर का तरल पदार्थ होता है जिसमें एक वृताकार DNA होता है।
Øयह अर्धस्वायत कोशिकांग है।
Øप्रत्येक क्लोरोप्लास्ट में एक हरे रंग का वर्णक पर्णहरित होता है जो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए आवश्यक होता है।
Øपर्णहरित सूर्य से प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है और इसका उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड और जल को ग्लूकोज में परिवर्तित करने के लिए करता है।
11. केन्द्रक (Nucleus):-
· केंद्रक की खोज Robert Brown ने की थी।
· केन्द्रक एक द्वि झिल्ली आबद्ध संरचना है जो केवल यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पायी जाती है।
· एक केन्द्रक का जैविक कार्य कोशिका विभाजन, उपापचय और वृद्धि के लिए आवश्यक DNA या आनुवंशिक सूचना को संग्रहित करना है।
· केन्द्रिका (Nucleolus):- यह कोशिका की प्रोटीन-निर्माण संरचनाओं और राइबोसोम्स का निर्माण करती है।
· केन्द्रकीय छिद्र (Nucleopore):- केन्द्रक झिल्ली को छिद्रों से छिद्रित होती है जिन्हें केन्द्रकीय छिद्र कहा जाता है जो प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल को गुजरने की अनुमति देता है।
· क्रोमेटिन:- केन्द्रक के अंदर DNA क्रोमेटिन के रूप में पाया जाता है। यह 2 प्रकार की होती है -
i. Euchromatin:- इसमें सक्रिय जीन होते हैं।
ii. Heterochromatin:- इसमें निष्क्रिय जीन होते हैं।

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